सिक्किम में BJP का नहीं एक भी विधायक, फिर भी उतारा राज्यसभा उम्मीदवार, क्या है रणनीति?

रईश खान | Updated:Jan 08, 2024, 07:18 PM IST

पीएम मोदी, जेपी नड्डा और अमित शाह (फाइल फोटो)

Sikkim Rajya Sabha Elections 2024: बीजेपी ने सिक्किम की एकमात्र राज्यसभा सीट से दोरजी त्शेरिंग लेप्चा को उम्मीदवार बनाया है. जानिए क्या है उसकी रणनीति.

डीएनए हिंदी: लोकसभा चुनाव में अब कुछ महीनों का समय बचा है, ऐसे में सभी पार्टियों ने सत्ता पाने की जुगत में रणनीति तेज कर दी है. लोकसभा के बाद इसी साल 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. लेकिन उससे पहले अलग-अलग राज्यों की 68 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होगा. इनमें सिक्किम की एकमात्र राज्यसभा सीट भी शामिल है. बीजेपी ने इस सीट के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है. भारतीय जनता पार्टी ने दोरजी त्शेरिंग लेप्चा को उम्मीदवार बनाया है.

सबसे खास बात तो ये है कि सिक्किम में बीजेपी का एक भी विधायक नहीं है. 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी खाता भी नहीं खोल पाई थी. इसके बावजूद पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है. इसके पीछे बीजेपी की क्या रणनीति है, क्या प्लान है? आइये समझते हैं.

समझें बीजेपी का गेम प्लान
दरअसल, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग जिन्हें पीएस गोले के नाम से भी जाना जाता है. वह एक भ्रष्टाचार के मामले दोषी ठहराए गए थे. पीएस गोले 10 अगस्त 2018 को सजा काटकर जेल से बाहर आए. इसके एक साल बाद 2019 में सिक्किम में विधानसभा चुनाव हुए. नियमों के मुताबिक भ्रष्टाचार के किसी मामले में दोषी ठहराए जाने पर कोई भी नेता 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता. पीएस गोले ने भी इसी वजह से चुनाव नहीं लड़ा. लेकिन इसके बावजूद उनकी पार्टी एसकेएम ने भारी सीटों पर जीत दर्ज की. पीएस गोले को विधायक दल का नेता चुना गया और वो मुख्यमंत्री बन गए. सीएम बनने के बाद अक्टूबर 2019 में उपचुनाव जीतकर पीएस गोले विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए.

विपक्षी पार्टी एसडीएफ ने इस जीत का विरोध किया. उन्होंने चुनाव आयोग पर पीएस गोले की अयोग्यता अवधि 6 साल से घटाकर एक साल करने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी. आरोप है कि बीजेपी के सहयोग से पीएस गोले की सीएम कुर्सी और विधायकी बची थी. गोले की बीजेपी के साथ डील हुई थी. जिसके तहत राज्यसभा की सीट बीजेपी को जितानी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि एसकेएम के विधायक बीजेपी उम्मीदवार को वोट कर सकते हैं. 

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जानकारों की मानें तो एसकेएस की उंगली पकड़कर बीजेपी राज्य में सियासी जमीन तलाशने में जुटी है. 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों पार्टियों (बीजेपी-एसकेएस) के बीच गठबंधन की बातचीत हुई थी. लेकिन किसी कारण यह गठबंधन परवान नहीं चढ़ पाया था.

क्या कहता है वोट का गणित?
32 सदस्यीय सिक्किम विधानसभा में पीएस गोल के नेतृत्व वाले सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा यानी SKM ने 2019 के चुनाव में 17 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी. जबकि पवन चामलिंग के नेतृत्व वाली सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 15 सीटें मिली थीं. मौजूदा समय में सिक्किम विधानसभा में SKM का संख्याबल 16 और विपक्षी SDF का 13 विधायकों का है. तीन सीटें रिक्त हैं. क्योंकि इन सीटों पर तीन विधायकों ने दो-दो जगह से चुनाव लड़ा था. दोनों जगहों से जीतने के बाद उन्हें एक जगह सीट छोड़नी पड़ी थी. अगर एसकेएम के सभी विधायक बीजेपी उम्मीदवार दोरजी त्शेरिंग लेप्चा को वोट देते हैं तो उनका जीतना तय है.

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