Khejadi Bachao Andolan क्या है? खुदाई के बाद जमीन से निकले पेड़ तो मच गया हंगामा

Written By नीलेश मिश्र | Updated: Jun 16, 2022, 10:04 AM IST

खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन पर उतरा बिश्नोई समाज

What is Khejri movement: राजस्थान के बाप इलाके में पेड़ कटवाए जाने को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब तेज होता जा रहा है. बिश्नोई समाज का प्रदर्शन जारी है.

डीएनए हिंदी: राजस्थान में पेड़ों की कटाई के खिलाफ एक आंदोलन (#खेज़डी_बचाओ) शुरू हो गया है. खेजड़ी के कई पेड़ों को काटे जाने का मामला गरमाता जा रहा है. इसी के विरोध में अब 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' (Khejri Bachao Andolan) शुरू हो गया है. पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील माना जाने वाला बिश्वोई समाज (Bishnoi Community) जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक इसके खिलाफ मुहिम चला रहा है. स्थानीय पुलिस और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद अब सोशल मीडिया पर भी मोर्चा खोल दिया गया है. ट्विटर और हैशटैग #बाप_प्रकरण पर ट्रेंड चलाकर कोशिश की जा रही है कि इस तरफ ध्यान दिया जाए और सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में कार्रवाई की जाए.

अखिल भारतीय जीवन रक्षा बिश्नोई सभा के प्रवक्ता शिवराज बिश्नोई ने बताया है कि राजस्थान के बड़ी सीड के बाप इलाके में स्थित कई सोलर प्लांट में खेजड़ी के सैकड़ों पेड़ काट दिए गए हैं. इसके विरोध में अब बिश्नोई समाज धरना-प्रदर्शन करेगा. बिश्नोई समाज की मांग है कि पेड़ कटवाने में लिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. आइए विस्तार से समझते हैं कि यह विवाद क्यों शुरू हुआ है...

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राजस्थान के लिए बेहद अहम है खेजड़ी
खेजड़ी, राजस्थान का राज्य वृक्ष है. साल 1988 में खेजड़ी पर भारत सरकार डाक टिकट भी जारी कर चुकी है. पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व होने की वजह से राजस्थान के लोगों, खासकर बिश्नोई समाज के लिए खेजड़ी का पेड़ काफी अहम है. एक तरह के कंटीले पेड़ को देश के अलग-अलग हिस्सों में शमी, खिजरो, झंड, जाट, खार, कांडा और जम्मी जैसे नामों से जाना जाता है.

राजस्थान में खेजड़ी को तुलसी के पौधों की तरह ही पूजा जाता है. बिश्वोई समाज पर्यावरण के प्रति काफी संवेदनशील माना जाता है. चाहे वह मामला हिरणों का हो या जंगलों को बचाने का. सदियों से बिश्नोई समाज ने प्रकृति को संरक्षित रखने और उसकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया है. कहा जाता है कि 11 सितंबर,1730 को जोधपुर के पास एक छोटे से गांव में बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने एक बहादुर महिला के नेतृत्व में खेजड़ी के पेड़ों को काटने का विरोध किया था जिसके चलते उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी.

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नया विवाद क्या है?
राजस्थान के अलग-अलग जिलों में खेजड़ी के पेड़ काटने का विरोध लंबे समय से होता रहा है. हाल में जोधपुर जिले के बाप में सोलर प्लांट के लिए हजारों पेड़ों को काटने का मामला सामने आया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसमें हजारों पेड़ खेजड़ी के भी थे. आरोप है कि प्रशासन के लोग इसमें मिले हुए हैं और उनकी मिलीभगत से ही ये पेड़ काटे जा रहे हैं. 

अखिल भारतीय जीवन रक्षा बिश्नोई सभा ने कहा है कि सोलर प्लांट के लिए ली गई जमीनों पर मौजूद खेजड़ी के हजारों पेड़ों को काट दिया गया. बिश्नोई समाज के मुताबिक, खेजड़ी के लगभग 8,000 पेड़ों को काटकर जमीन में दफना दिया गया था. बिश्नोई समाज ने इन पेड़ों को खोज निकाला और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, प्रशासन इस मामले में कोई सुनवाई नहीं कर रहा है. 

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खुदाई करके दिखाया सच, जमीन से निकले कटे हुए पेड़
अपने आरोपों की सच्चाई साबित करने के लिए स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों, बिश्नोई समाज के लोगों और महंत भगवानदास की अगुवाई में जब जेसीबी से खुदाई करवाई गई तो खजेड़ी के पेड़ों के अवशेष जमीन में दबे मिले. इस तरह से सच उजागर होने के बाद अब प्रशासन के भी कान खड़े हो गए हैं. जमीन से पेड़ निकलने की घटना सामने आने के बाद इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया.

बिश्नोई समाज का आरोप है कि इस इलाके में हिरण भी रहते थे लेकिन अब वे नहीं दिख रहे. स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि हिरणों को भी मारकर दफना दिया गया है. यही वजह है कि इलाके में जगह-जगह खुदाई कराने के लिए जोधपुर प्रशासन से अनुमति मांगी जा रही है. स्थानीय लोगों की मांग है कि पेड़ों की कटाई तत्काल रोकी जाए.

इसके अलावा, यह भी मांग की जा रही है कि पेड़ों की कटाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, पुलिस के जिम्मेदार लोगों और कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करके कार्रवाई की जाए. पर्यावरणविदों का कहना है कि सोलर प्लांट लगाने के लिए इस तरह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बजाय वैकल्पिक रास्ते तलाशे जाएं और नहरों के किनारे सोलर प्लांट लगाए जाएं.

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