Bilkis Bano रेप केस के दोषियों को मिले सम्मान से देवेंद्र फडणवीस नाराज, बोले- यह गलत है

डीएनए हिंदी वेब डेस्क | Updated:Aug 23, 2022, 10:07 PM IST

बिल्किस बानो केस में अदालत से दोषी साबित हो चुके 11 लोगों को गुजरात सरकार ने रिहा कर दिया है. इन सभी को स्वतंत्रता दिवस पर पुरानी सजामाफी नीति के तहत रिहा किया गया, जिसकी सब आलोचना कर रहे हैं.

डीएनए हिंदी: बिल्किस बानो (Bilkis Bano) से रेप करने के 11 दोषियों को गुजरात (Gujarat) सरकार की तरफ से जेल से रिहा किया जा चुका है. राज्य सरकार ने इन सभी को स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर पुरानी सजामाफी नीति के तहत रिहा किया, जिसके बाद इन सभी का बाहर बहुत बड़ा सम्मान किया गया. इस फैसले की हर तरफ आलोचना हो रही है.

यहां तक कि कई लोगों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस को पत्र भी लिखा है. दोषियों के जेल से बाहर आने पर मिठाई बांटने और उन्हें मालाएं पहनाए जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इससे भाजपा के दिग्गज नेता व महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भई नाराज हैं. उन्होंने कहा, एक दोषी हमेशा दोषी ही रहता है और इस तरह उनका सम्मान करने का कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता.

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महाराष्ट्र विधान परिषद में दे रहे थे एक गैंगरेप केस का जवाब

फडणवीस महाराष्ट्र विधान परिषद (Maharashtra Legislative Council) में राज्य के भंडारा (Bhandara) जिले की एक घटना पर चल रही चर्चा में जवाब दे रहे थे. भंडारा जिले में एक 35 साल की महिला के साथ 3 लोगों के गैंगरेप करने का आरोप है. इस दौरान विपक्ष ने बिल्किस बानो केस का जिक्र चर्चा के दौरान किया. इस पर फडणवीस ने कहा, इस सदन में बिल्किस बानो मामले का जिक्र करने का कोई कारण नहीं है. 

फडणवीस ने कहा, गुजरात के साल 2002 के बिल्किस बानो मामले के दोषियों की रिहाई सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में की गई, लेकिन एक अपराध के दोषी को सम्मानित करना गलत है और इस काम का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता.

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केंद्र की नीति के विपरीत की गई थी बानो केस में रिहाई

दरअसल बिल्किस बानो केस में दोषियों की रिहाई केंद्र सरकार और गुजरात सरकार की मौजूदा नीति के विपरीत की गई थी. इस मामले में दोषियों को रिहा करने की सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश गुजरात सरकार की 1992 की सजामाफी नीति के आधार पर थी, जिसमें रेप के दोषियों या उम्रकैद की सजा पाने वालों को वक्त से पहले रिहा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने यह सिफारिश दोषियों में से एक कैदी की तरफ से लगाई गई गुहार पर फैसला करते समय की थी. 

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विशेष सजामाफी मामलों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन्स जून में जारी की गई थी. इसमें कहा गया है कि जो उम्रकैद की सजा पा चुके हैं और जिन्हें रेप के मामले में दोषी माना गया है, उन कैदियों को सजामाफी नहीं दी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट करेगा रिहाई के खिलाफ सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट भी अब बिल्किस बानो मामले के दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुनवाई करने को तैयार है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने CPM पोलित ब्यूरो मेंबर सुभाषिनी अली (Subhashini Ali), तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) व एक अन्य का याचिकाओं को सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्णय लिया है. 

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