प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए जरूरी है ये वाला पास, अभी से जान लें नियम

अभिषेक शुक्ल | Updated:Jan 19, 2024, 03:02 PM IST

अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर.

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आने के लिए सिर्फ न्योता पर्याप्त नहीं है. अगर आपने एंट्री पास नहीं लिया है तो मंदिर प्रांगण में प्रवेश नहीं मिलेगा.

डीएनए हिंदी: अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने वाली है. प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए देशभर की दिग्गज हस्तियों को न्योता भेजा गया है. राजनीति, खेल, मनोरंजन और अर्थ जगत की गई दिग्गज हस्तियां इस ऐतिहासिक पल को देखने पहुंच रही हैं. मंदिर के प्रांगण में प्रवेश के लिए सिर्फ न्योता ही अनिवार्य नहीं है. VIP हस्तियों के लिए भी एंट्री पास अनिवार्य कर दिया गया है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जारी दिशा निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि मंदिर में प्रवेश के लिए पास का होना अनिवार्य है. सिर्फ न्योता दिखाने से एंट्री नहीं मिलेगी. अगर आपका एंट्री क्यूआर कोड मैच होता है, तभी प्रांगण के भीतर आपको घुसने दिया जाएगा. तीर्थ ट्रस्ट की ओर से एंट्री पास का एक प्रारूप भी शेयर किया गया है.

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कैसे मंदिर में मिलेगा प्रवेश
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने X पर पोस्ट किया है, 'भगवान रामलला सरकार के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव में प्रवेश केवल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा जारी की गई प्रवेशिका के माध्यम ही संभव है. केवल निमंत्रण पत्र से आगंतुकों को प्रवेश सुनिश्चित नहीं हो पाएगा. प्रवेशिका पर बने QR code के मिलान के पश्चात ही परिसर के प्रवेश संभव हो पाएगा.'

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मंदिर के अनुष्ठान में अब तक क्या-क्या हुआ?
रामलला के मंदिर गुरुवार को राममूर्ति स्थापित हुई है. दोपहर 1:20 बजे यजमान ने प्रधानसंकल्प पूरा किया और वेदमन्त्रों की ध्वनि से मंदिर गूंज उठा. मूर्ति के जलाधिवास तक के काम गुरुवार को पूरे हो गए. शुक्रवार सुबह 9 बजे अरणिमन्थन से अग्नि प्रकट की गई है. उससे पहले गणपति आदि स्थापित देवताओं का पूजन, द्वारपालों द्वारा सभी शाखाओं का वेदपारायण, देवप्रबोधन, औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास, कुण्डपूजन, पञ्चभूसंस्कार किया गया है.

अरणिमन्थन से पैदा हुई अग्नि को कुंड में स्थापित किया गया है. अब ग्रहस्थापन, असंख्यात रुद्रपीठस्थापन, प्रधानदेवतास्थापन, राजाराम भद्र, श्रीरामयन्त्र, बीठदेवता, अङ्गदेवता, आवरणदेवता, महापूजा, वारुणमण्डल, योगिनीमण्डलस्थापन, क्षेत्रपालमण्डलस्थापन, ग्रहहोम, स्थाप्यदेवहोम, प्रासाद वास्तुश्शान्ति, धान्याधिवास सायंकालिक पूजन और  आरती शेष है.

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