Margashirsha Purnima 2022: मार्गशीर्ष पूर्णिमा आज, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और क्या है महत्व

डीएनए हिंदी वेब डेस्क | Updated:Dec 07, 2022, 06:29 AM IST

मार्गशीर्ष पूर्णिमा सही डेट, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Purnima: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है, आज है पूर्णिमा, कैसे करें पूजा

डीएनए हिंदीः Margashirsha Purnima 2022- सनातन धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा का खास महत्व होता है. मार्गशीर्ष यानी अगहन महीना भगवान श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय माह माना जाता है. इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण,  भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, व्रत एवं दान-पुण्य करने के अलावा चंद्रमा की उपासना जरूर करनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा को अमृत से सींचा गया था. कहा जाता है कि जो भी मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत रखता है उसे जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है. चलिए जानते हैं मार्गशीर्ष पूर्णिमा का सही डेट, शुभ मुहूर्त और इस दिन चंद्र देव की पूजा का महत्व. 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि व शुभ मुहूर्त (Margashirsha Purnima Tithi And Shubh Muhurt)

आज यानि बुधवार 7 दिसंबर मार्गशीर्ष पूर्णिमा है. यह तिथि सुबह 08 बजकर 02 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन 08 दिसंबर 2022 को सुबह 09 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी. इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत 7 दिसंबर को रखा जाएगा. वहीं स्नान-दान 08 दिसंबर दिन गुरुवार को किया जाएग.

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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा विधि (Margashirsha Purnima 2022 Puja Vidhi)

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और इसके बाद व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और इसके बाद घी का दीपक जलाएं. फिर भगवान विष्णु को पीला चंदन लगाएं और ॐ नमोः नारायण मंत्र का जाप करते हुए श्री हरि का आह्वान करें. भगवान को पीली मिठाई का भोग लगाएं और अंत में आरती कर प्रसाद घर के सभी सदस्यों में बांट दें. 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व (Margashirsha Purnima 2022 Importance)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर व्रत और पूजा से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.  इस दिन तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान जरूर करना चाहिए. कहते हैं कि इस दिन किए जाने वाले स्नान-दान का फल अन्य पूर्णिमा की तुलना में 32 गुना अधिक मिलता है इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है. इसके अलावा मार्गशीर्ष पूर्णिमा के अवसर पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा करने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं. 

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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष की पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा को दूध से अर्घ्य देने पर मानसिक शांति मिलती है. इसके साथ ही चंद्र देव की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.  पूर्णिमा पर चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को कच्चे दूध में मिश्री और चावल मिलाकर अर्घ्य जरूर देना चाहिए ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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