डीएनए हिंदी: (Lord Shiva Shivling Parikrama) सावन के माह में भगवान शिव के मंदिरों में भारी भीड़ रहती है. भोलेनाथ के भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से लेकर उनकी मनपसंद की चीजों को अर्पित करते हैं. इसे भगवान शिव मनोकामनाओं को पूर्ण कर भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं. भगवान का कृपा रूप पिता से कम नहीं होता. वहीं भोलेनाथ नाराज होने पर रूद्र रूप धारण कर लेते हैं. उनकी नाराजगी की वजह कई बार भक्त भूल भी बन जाती है.
जैसे अगर आप भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना करने जा रहे हैं तो भूलकर भी उनकी शिवलिंग के चारों तरफ परिक्रमा न लगाएं. अगर आप ऐसा करते हैं इसे भगवान प्रसन्न होने की जगह रुष्ट हो जाते हैं. ऐसा करने से आप पाप के भागीदार बन जाते हैं. इसे बचने के लिए कभी भी शिवलिंग की सिर्फ आधी परिक्रमा करें. शिवलिंग से निकलने वाली जगह पर पैर न रखें. आइए जानते हैं कैसे करें भगवान भोले नाथ की परिक्रमा. पूरी परिक्रमा न करने की वजह...
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अगर आप शिवलिंग पर जलाभिषेक कर परिक्रमा के दौरान या उसके बाद चारों ओर घूम रहे हैं तो आप भी वही गलती कर रहे हैं जिससे भगवान शिव नाराज होते हैं.
शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें. इसके बाद वापस लोटकर दूसरी परिक्रमा करनी चाहिए. शिवलिंग के चारों तरफ घूमकर परिक्रमा करने से दोष लगता है. ऐसा करेन से पुण्य की जगह पाप लगता है. इसकी वजह शिवलिंग पर चढ़ाया गया, जल जहां से बाहर निकलता है. वह पार्वती का हिस्सा माना जाता है. इसलिए उसे कभी नहीं लाघंना चाहिए.
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भगवान शिव छिन लेते हैं शक्ति
शिव पुराण में बताया गया है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा तो करनी चाहिए, लेकिन निर्मली यानी जहां से जल निकाली होती है, उसे नहीं लांघना चाहिए. इसे भगवान शिव शरीर की एनर्जी को खत्म कर देते हैं. पाप भी लगता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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