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Baba Shyam Birthday 2023: आज मनाया जाएगा खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव, जानें निशान का मतलब और महत्व 

देश ही नहीं दुनियाभर से बाबा के भक्त राजस्थान के सिंकर पहुंच रहे हैं. यहां बाबा के दर्शन के लिए लंबी लंबी कतारें लगती हैं. इसकी वजह कुछ लोगों को ​मन्नत मांगने जाना है तो बहुत से लोग मन्नत पूरी होने के बाद बाबा को निशान चढ़ाते हैं.

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डीएनए हिंदी: हर साल देवउठनी एकादशी पर हारे का सहारे खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस बार यह तिथि 23 नवंबर दिन गुरुवार को है. बाबा खाटू श्याम जी का जन्मदिन पर राजस्थान के सिंकर में भक्तों की भीड़ जुट गई है. देश ही नहीं दुनियाभर से बाबा के भक्त राजस्थान के सिंकर पहुंच रहे हैं. यहां बाबा के दर्शन के लिए लंबी लंबी कतारें लगती हैं. इसकी वजह कुछ लोगों को ​मन्नत मांगने जाना है तो बहुत से लोग मन्नत पूरी होने के बाद बाबा को निशान चढ़ाते हैं. हालांकि बहुत से लोग अब भी ऐसे हैं, जिन्हें बाबा के निशान का मतलब और महत्व नहीं पता है. आइए खाटू श्याम जी के जन्मोत्सव पर जानते हैं निशान का मतलब और इसका महत्व...

ऐसा होता है निशान

खाटू श्याम बाबा के ध्वज का रंग केसरिया, नारंगी और लाल होता है. इस पर भगवान कृष्ण और खाटू श्याम बाबा का चित्र बना होता है. साथ ही कुछ में उनका नाम व मंत्र अंकित होता है. इनमें नारियल या फिर खाटू श्याम को सबसे प्यारा लगने वाला मोर पंख भी अंकित होता है. इसी को निशान कहते हैं. मान्यता है कि इस निशान को भगवान के श्री चरणों में मनोकामना पूर्ति पर चढ़ाया जाता है. इससे पहले निशान की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कुछ लोग खाटू श्याम जी से 17 किलोमीटर दूर रिंगस से इस निशान को उठाकर पैदल खाटू श्याम जी में बाबा दरबार तक पहुंचते हैं. खाटू श्याम जी में बाबा के भक्त सोने और चांदी से बने निशान भी चढ़ाते हैं. 

जानें क्या है निशान का महत्व

खाटू श्याम बाबा को निशान चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है. पौराणिक कथाओं में भी इसका बखान किया गया है. खाटू श्याम जी को चढ़ाये जाने वाले निशान झंडा भी कहा जाता है. हिंदू धर्म मतें यह विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. साथ ही यह निशान श्याम बाबा द्वारा बलिदान और दान का प्रतीक माना जाता है. जब भगवान कृष्ण ने बरबरीक से दान मांगा था. तब उन्होंने बिना ​कुछ सोचे समझें अपने शीश भगवान के चरणों में रख दिया था. तभी श्री कृष्ण ने युद्ध में जीत का श्रेय भगवान श्री कृष्ण को दिया था.  

जानें क्या है निशान यात्रा

निशान को कुछ लोग अपने घर से लेकर निकलते हैं तो कुछ लोग नंगे पांव चलकर भगवान के मंदिर तक जाकर समर्पित करते हैं. कुछ भक्त रिंगस से राजस्थान के सिंकर तक निशान लेकर जाते हैं. अब बाबा के भक्तों की संख्या बढ़ने के साथ ही निशान यात्रा पथ पर लोग बढ़ रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए, निशान यात्रा हर माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को चढ़ाया जा सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा निशान फाल्गुन मास में लगने वाले मेले में चढ़ाए जाते हैं. निशान यात्रा एक तरह की पदयात्रा होती है. जिसमें भगवान हाथों में श्रीश्याम ध्वज को पकड़कर खाटू श्याम मंदिर तक आते हैं. इस यात्रा को श्रीश्याम ध्वज का निशान भी काह जाता है.

Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ से परामर्श करें.)

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